उत्तराखंड के देहरादून और हरिद्वार में कुट्टू के आटे से बने व्यंजन खाने के बाद 363 लोग बीमार पड़ गए। यह आटा सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) से सप्लाई किया गया था। इस घटना के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर पुलिस ने मामले की गंभीरता से जांच शुरू कर दी है।
साहरणपुर और देहरादून के थोक व्यापारी गिरफ्तार
देहरादून में आटा सप्लाई करने के मामले में पुलिस ने सहारनपुर के दो और देहरादून के एक थोक व्यापारी को गिरफ्तार किया है। वहीं, एक चक्की मालिक की तलाश की जा रही है। इन सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है।
29 दुकानों पर छापेमारी
इसके अलावा, पुलिस ने 29 दुकानों में छापेमारी कर कुट्टू का आटा जब्त किया है। हरिद्वार में भी आटा सप्लाई करने वाले सहारनपुर के निर्माता और लक्सर के सप्लायर पर मुकदमा दर्ज किया गया है।
फूड प्वाइजनिंग के शिकार मरीजों की संख्या बढ़ी
रविवार रात बड़ी संख्या में मरीज दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल, जिला चिकित्सालय (कोरोनेशन अस्पताल), श्रीमहंत इंदिरेश अस्पताल सहित अन्य अस्पतालों में फूड प्वाइजनिंग के शिकार होकर पहुंचने लगे। इन मरीजों को पेट दर्द, उल्टी, दस्त जैसी समस्याएं हो रही थीं। अस्पतालों में इलाज जारी है और उनकी स्थिति अब स्थिर बताई जा रही है।
इस मामले के बाद स्वास्थ्य विभाग और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की जांच और निगरानी बढ़ा दी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।
सभी मरीजों को उल्टी, जी मिचलाना, चक्कर आना और घबराहट की शिकायत थी। जब उनसे पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि नवरात्र के पहले दिन व्रत रखने के कारण उन्होंने शाम को कुट्टू के आटे से बनी पूरी आदि खाई थी। इसके बाद उनकी तबियत बिगड़ गई और उन्हें उल्टी, जी मिचलाना, चक्कर आना और घबराहट जैसी समस्याएं होने लगीं।
रातभर अस्पतालों में मरीजों को लाने-ले जाने का सिलसिला जारी रहा। अस्पतालों में इलाज करने वाले डॉक्टरों ने बताया कि फूड प्वाइजनिंग के लक्षण दिखाई दे रहे थे और मरीजों को इलाज के बाद राहत मिली है। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि खाद्य सामग्री की गुणवत्ता और सुरक्षा पर कड़ी निगरानी की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में इस तरह की समस्याओं से बचा जा सके।