रोहित कुमार सोनी
देहरादून: उत्तराखंड में लगातार बढ़ रही सड़क दुर्घटनाएं राज्य सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं. हाल ही में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रोड सेफ्टी को लेकर संबंधित विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक की थी, जिसमें तमाम महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की गई थी. हालांकि, हर साल रोड सेफ्टी को लेकर तमाम कवायदें की जाती हैं, बावजूद इसके प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं के मामले और दुर्घटना में होने वाला मौतों का आंकड़ा सरकार और विभाग के लिए चुनौती बनता जा रहा है.
उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्र समेत पर्वतीय क्षेत्र में सड़क दुर्घटनाएं होना आम बात हो गई है. ऐसा इसलिए भी है, क्योंकि पर्वतीय क्षेत्रों में वाहन चलाना मैदानी क्षेत्रों के मुकाबले काफी कठिन है. क्योंकि पर्वतीय मार्गों पर यात्रा करने के दौरान तमाम सावधानियां बरतनी पड़ती है, यही वजह है कि मैदानी क्षेत्र के मुकाबले पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क दुर्घटनाओं के मामले भी काफी अधिक देखे जा रहे हैं.
2025 में सितंबर माह तक 1300 से ज्यादा रोड एक्सीडेंट रिकॉर्ड हुए (VIDEO- ETV Bharat)
प्रदेश में लगातार बढ़ रहे सड़क दुर्घटनाओं को देखते हुए राज्य सरकार द्वारा रोड सेफ्टी के लिए कार्रवाई तो की जा रही है, लेकिन उसका कुछ खास असर धरातल पर देखने को नहीं मिल रहा है. परिवहन विभाग से मिले आंकड़े ही इस बात की तस्दीक कर रहे हैं. परिवहन विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में सितंबर माह तक प्रदेश भर में 1,369 सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं. इन सड़क दुर्घटनाओं में 932 लोगों की मौत हुई है.
ओवर स्पीडिंग, ड्रंक एंड ड्राइव के खिलाफ अभियान तेज (VIDEO- ETV Bharat)
ईटीवी भारत से बातचीत करते हुए संयुक्त परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह ने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाए जाने को लेकर तमाम प्रयास किए गए हैं. बावजूद इसके जितनी सफलता मिलनी चाहिए, उतनी सफलता नहीं मिल पाई है. पिछले कुछ सालों में सड़क दुर्घटनाओं में लगभग 3 से 4 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई है.
परिवहन विभाग का उद्देश्य है कि सड़क दुर्घटनाओं के कम होने के साथ ही मौतों के आंकड़े में भी कमी आए. इसी क्रम में सड़क सुरक्षा की नई नीति तैयार की गई. जिस नीति में लगभग सभी संबंधित विभागों का इनपुट उपलब्ध है. रोड सेफ्टी से संबंधित मुख्य विभागों के साथ ही ऊर्जा विभाग, वन विभाग समेत विभागों को भी शामिल किया गया है. ऐसे में नीति मंजूरी मिलने के बाद लागू हो गई है.
– सनत कुमार सिंह, संयुक्त परिवहन आयुक्त, उत्तराखंड –
2025 सितंबर माह तक प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं की जिलेवार स्थिति (PHOTO- ETV Bharat)
क्रैश बैरियर से दुर्घटनाओं में आएगी कमी: नीति बनने के साथ ही पहली बार राज्य में क्रैश बैरियर लगाए जाने को लेकर 900 करोड़ रुपए जारी किए गए, जिसमें से 750 करोड़ रुपए क्रैश बैरियर लगाने में खर्च किए जा चुके हैं. हालांकि, अभी वर्तमान समय में दो से ढाई हजार किलोमीटर सड़क मार्ग छूटा हुआ है, जहां क्रैश बैरियर लगाया जाना है. ऐसे में प्रदेश भर में क्रैश बैरियर लग जाने के बाद सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी. हालांकि, छोटी-मोटी दुर्घटनाएं होने की संभावना बनी रहती है, लेकिन बड़ी दुर्घटना को होने से बचाया जा सकेगा. देहरादून, हरिद्वार और उधम सिंह नगर में सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ ज्यादा है, जिसको देखते हुए सड़क के बीचों बीच लगाए गए डिवाइडर की वजह से दुर्घटनाओं में कमी आई है.

2024 में प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं की जिलेवार स्थिति (PHOTO-ETV Bharat)
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आयुष्मान योजना से घायलों का इलाज:
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2023 में प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं की जिलेवार स्थिति (PHOTO-ETV Bharat)
ब्लैक स्पॉट चिन्हित: प्रदेश भर में तमाम चिन्हित किए गए थे, जहां अमूमन सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं. ऐसे में प्रदेश भर में करीब 140 जगह चिन्हित के गए थे, जहां सुधार कार्य किए गए थे. जिसमें से 60 ब्लैक स्पॉट ऐसे थे, जहां ज्यादा दुर्घटनाएं नहीं हुई हैं. 40 स्पॉट ऐसे हैं जहां बिल्कुल भी सड़क दुर्घटनाएं नहीं हुई है. लेकिन 40 ब्लैक स्पॉट ऐसे हैं, जहां सुधार कार्य किए जाने के बावजूद भी सड़क दुर्घटनाएं लगातार हो रही हैं. ऐसे में इन जगहों के लिए साइंटिफिक विश्लेषण करवाया जाएगा, ताकि असल वजहों का पता लगाया जा सके. इसके अलावा सड़क बनने के बाद पीडब्लूडी खुद सड़कों का ऑडिट करवाता है. ऐसे में निर्णय लिया गया है कि सड़कों का थर्ड पार्टी ऑडिट भी करवाया जाएगा.

बढ़ते सड़क हादसे परिवहन विभाग के लिए चुनौती बन गए. (PHOTO-ETV Bharat)
सड़क दुर्घटनाओं का वैज्ञानिक विश्लेषण:
सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाए जाने को लेकर वैज्ञानिक तरीके से जांच भी कराई जा रही है. इसके लिए सीएसआर फंड के तहत जेपी रिसर्च इंस्टीट्यूट की ओर से टीम उपलब्ध कराई गई है, जो देहरादून जिले में हो रही हर सड़क दुर्घटनाओं का वैज्ञानिक विश्लेषण कर रहे हैं. जिसमें सॉफ्टवेयर, फॉरेंसिक, टायर के निशान, वाहन के ब्रेक की स्थिति समेत जरूरी पहलुओं का वैज्ञानिक विश्लेषण करते हैं. ऐसे में दुर्घटना के असल वजहों की जानकारी का पता चल जाता है. ऐसे में परिवहन विभाग सड़क दुर्घटनाओं से संबंधित डाटा भी एकत्र कर रहा है, जो भविष्य में सड़क दुर्घटनाओं के दौरान काफी उपयोगी साबित होंगे.
– सनत कुमार सिंह, संयुक्त परिवहन आयुक्त, उत्तराखंड

परिवहन विभाग ने हादसों के ब्लैक स्पॉट भी चिन्हित किए हैं. (PHOTO-ETV Bharat)
सड़क सुरक्षा को लेकर कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी बैठक की थी. बैठक के दौरान ये निर्देश दिए गए हैं कि पुलिस प्रशासन की ओर से ओवर स्पीडिंग, ड्रंक एंड ड्राइव के खिलाफ अभियान चलाया जाए. साथ ही ट्रैफिक नियमों का पालन न करने वाले लोगों का चालान काटने के साथ ही ट्रैफिक एजुकेशन के लिए अवेयरनेस प्रोग्राम भी चलाया जाएगा.
– वी मुरुगेशन, एडीजी लॉ एंड ऑर्डर, उत्तराखंड

परिवहन विभाग नीति के तहत दुर्घटनाओं की वैज्ञानिक जांच भी कर रहा है. (PHOTO-ETV Bharat)
सड़कों पर जो क्रैश बैरियर लगाए गए हैं, वो 9 इंच और सड़क की तरफ लगाए गए हैं. जिससे सड़क और पतली हो गई है. ऐसे में अधिकारियों को इस बाबत कहा गया है कि सड़कों को चौड़ा किया जाए. खासकर चढ़ाई और मोड़ वाली जगह पर गाड़ी तेजी से नहीं चलती है. ऐसे में क्रैश बैरियर, 9 इंच अंदर लगा देने से दिक्कत होती है, लिहाजा इसका कोई समाधान ढूंढे. इसके अलावा सीएम धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सेफ्टी बेल्ट, एल्कोहल टेस्टिंग पर विशेष ध्यान दिया जाए, जो सेफ्टी के लिए बहुत जरूरी है.
– सतपाल महाराज, कैबिनेट मंत्री –

सबसे ज्यादा हादसों के कारणों में तेज रफ्तार भी शामिल. (PHOTO-ETV Bharat)
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प्रदेश में सितंबर 2025 तक सड़क दुर्घटनाओं की स्थिति:
प्रदेश भर में सितंबर महीने तक 1,369 सड़क दुर्घटनाएं हुई, जिन सड़क दुर्घटनाओं में 932 लोगों की मौत हुई है. |

पहाड़ी इलाकों में हादसा का ग्राफ बढ़ा है. (PHOTO-ETV Bharat)
साल 2024 में प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं की स्थिति:
| जिले | दुर्घटनाएं | मौतें | घायल |
|---|---|---|---|
| उत्तरकाशी | 17 | 20 | 41 |
| टिहरी गढ़वाल | 54 | 36 | 69 |
| चमोली | 22 | 14 | 28 |
| रुद्रप्रयाग | 12 | 23 | 30 |
| पौड़ी गढ़वाल | 31 | 28 | 35 |
| देहरादून | 511 | 209 | 431 |
| हरिद्वार | 434 | 283 | 344 |
| नैनीताल | 170 | 133 | 138 |
| उधम सिंह नगर | 422 | 271 | 322 |
| अल्मोड़ा | 19 | 44 | 40 |
| पिथौरागढ़ | 24 | 7 | 44 |
| चंपावत | 26 | 17 | 22 |
| बागेश्वर | 5 | 5 | 3 |
| प्रदेश भर में 1747 सड़क दुर्घटनाएं हुई, जिसमें 1090 लोगों की मौत और 1547 लोग घायल हुए. |

सड़कों के किनारे क्रैश बैरियर न होना भी हादसों का बड़ा कारण है (PHOTO-ETV Bharat)
साल 2023 में गढ़वाल रीजन के जिलों में हुए सड़क हादसों की जिले की स्थिति: उत्तरकाशी जिले में 18 सड़क दुर्घटनाएं हुई, जिसमें 27 लोगों की मौत और 44 लोग घायल हुए. टिहरी गढ़वाल जिले में 47 सड़क दुर्घटनाएं हुई, जिसमें 37 लोगों की मौत और 57 लोग घायल हुए. चमोली जिले में 17 सड़क दुर्घटनाएं हुई, जिसमें 12 लोगों की मौत और 46 लोग घायल हुए. रुद्रप्रयाग जिले में 12 सड़क दुर्घटनाएं हुई, जिसमें 11 लोगों की मौत और 8 लोग घायल हुए. पौड़ी गढ़वाल जिले में 24 सड़क दुर्घटनाएं हुई, जिसमें 11 लोगों की मौत और 17 लोग घायल हुए. देहरादून जिले में 481 सड़क दुर्घटनाएं हुई, जिसमें 201 लोगों की मौत और 397 लोग घायल हुए. हरिद्वार जिले में 412 सड़क दुर्घटनाएं, जिसमें 275 लोगों की मौत और 318 लोग घायल हुए.

तेज रफ्तार के कारण भी वाहन हादसों का शिकार का ग्राफ बढ़ रहा है. (PHOTO-ETV Bharat)
साल 2023 में कुमाऊं रीजन के जिलों में हुए सड़क हादसों की जिले की स्थिति: नैनीताल जिले में 195 सड़क दुर्घटनाएं, जिसमें 126 लोगों की मौत और 188 लोग घायल हुए. उधम सिंह नगर जिले में 425 सड़क दुर्घटनाएं, जिसमें 301 लोगों की मौत और 362 लोग घायल हुए. अल्मोड़ा जिले में 16 सड़क दुर्घटनाएं, जिसमें 6 लोगों की मौत और 12 लोग घायल हुए. पिथौरागढ़ जिले में 18 सड़क दुर्घटनाएं, जिसमें 23 लोगों की मौत और 19 लोग घायल हुए. चंपावत जिले में 21 सड़क दुर्घटनाएं, जिसमें 17 लोगों की मौत और 14 लोग घायल हुए. बागेश्वर जिले में 5 सड़क दुर्घटनाएं, जिसमें 7 लोगों की मौत और 6 लोग घायल हुए.
प्रदेश भर में 1691 सड़क दुर्घटनाएं हुई, जिसमें 1054 लोगों की मौत और 1488 लोग घायल हुए.
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