राहुल गांधी, सोनिया गांधी (फाइल फोटो) (ANI)
नई दिल्ली : दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्लू) ने नेशनल हेराल्ड मामले में एक नई एफआईआर दर्ज की है. एफआईआर में राहुल गांधी और सोनिया गांधी के नाम शामिल हैं. इनके अलावा छह और नाम शामिल हैं. ईडी मुख्यालय द्वारा ईओडब्लू में शिकायत दर्ज कराने के बाद यह एफआईआर दर्ज की गई है.
एफआईआर में उन पर आपराधिक साजिश रचने के आरोप लगे हैं. आरोप लगा है कि द एसोसिएटेड जर्नल लि. के पास जितनी संपत्ति थी, उसे हासिल करने के लिए उन्होंने पूरा षडयंत्र रचा. आरोपियों में तीन कंपनियों के भी नाम हैं. ये नाम हैं, एजेएल, यंग इंडिया लि और डोटेक्स एमपीएल. डोटेक्स को शेल कंपनी बताया गया है. यह कोलकाता में रजिस्टर्ड थी. इसने यंग इंडिया लि को एक करोड़ रुपये दिए थे.
Delhi Police’s Economic Offences Wing (EOW) files a new FIR in the National Herald Case. FIR details include six names besides Rahul Gandhi and Sonia Gandhi. The FIR was registered after the ED headquarters filed a complaint with the EOW.
— ANI (@ANI) November 30, 2025
कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि प्राथमिकी “न तो नयी शराब है, न नयी बोतल और न ही नया गिलास.” उन्होंने कहा, “यह एक ऐसा अनोखा मामला है जहां न तो कोई पैसा इधर-उधर हुआ, न ही कोई अचल संपत्ति हस्तांतरित हुई, फिर भी धन शोधन का मामला खोज लिया गया.”
#NatHerald neither wine new nor bottle new nor glasses new. Hence my comment also old. One trick wonder of a case where no money moved, where no immovable property transferred yet money laundering invented upon creation of #YoungIndian as a not for profit co to merely hold shares…
— Abhishek Singhvi (@DrAMSinghvi) November 30, 2025
एफआईआर में ईडी द्वारा 4 सितंबर को ईओडब्ल्यू को भेजे गए पत्र में लगाए गए आरोपों का संज्ञान लिया गया है. ईडी के पत्र की विषय-वस्तु केंद्रीय एजेंसी द्वारा अपने आरोपपत्र में किए गए दावों के समान है.
पीटीआई के अनुसार ईडी ने पुलिस प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 66 (2) के तहत उपलब्ध शक्तियों का इस्तेमाल किया. यह धारा संघीय एजेंसी को कानून प्रवर्तन एजेंसी द्वारा आपराधिक मामला दर्ज करने के लिए साक्ष्य साझा करने की अनुमति देती है, ताकि वह जांच को आगे बढ़ाने के लिए धन शोधन का मामला दर्ज कर सके.
आपको बता दें कि नेशनल हेराल्ड में पहले से भी मामला दर्ज है. क्या है पूरा मामला, इसे ऐसे समझें.
दरअसल पूरे मामले की शुरुआत 1937-38 से होती है. उस समय द एसोसिएटेड जर्नल नाम से एक कंपनी बनाई गई. कंपनी के निवेशकों में से एक जवाहर लाल नेहरू थे. बाकी के अन्य निवेशक कांग्रेस पार्टी से जुड़े हुए थे. इनकी संख्या करीब पांच हजार के आसपास थी.
द एसोसिएटेड जर्नल ने तीन न्यूज पेपरों का प्रकाशन शुरू किया. ये थे- नेशनल हेराल्ड, नवजीवन और कौमी आवाज. कौमी आवाज ऊर्दू में प्रकाशित होता था. नेशनल हेराल्ड अंग्रेजी में और नवजीवन हिंदी में छपता था. कंपनी का कहना था कि इन तीनों ही अखबारों के प्रकाशन की वजह से उसे घाटा हो रहा है. इसलिए 2008 में उसने प्रकाशन बंद कर दिया. इस दौरान कंपनी ने यह भी कहा कि उस पर 90 करोड़ रुपये का कर्ज हो गया है.
इस लोन को चुकाने के लिए द एसोसिएटेड जर्नल ने कांग्रेस पार्टी से 90 करोड़ रुपये का धन उधार लिया. पूर्व सांसद सुब्रमण्यम स्वामी का कहना है कि किसी भी राजनीतिक पार्टी को किसी भी कंपनी के लिए लोन देने का कोई अधिकार नहीं है.
साल 2010 में जिस समय यूपीए की सरकार थी, एक नई कंपनी बनाई गई. इसका नाम रखा गया- यंग इंडिया लि.. इस कंपनी के प्रमुख शेयर धारक थे- सोनिया गांधी और राहुल गांधी. इन दोनों के पास 76 फीसदी हिस्सेदारी थी. अन्य शेयरधारकों में मोतीलाल बोरा, ऑस्कर फर्नान्डिज और सुमन दुबे थे.
स्वामी का आरोप है कि इस यंग इंडिया लिमिटेड ने द एसोसिएटेड जर्नल की संपत्तियों पर कब्जा कर लिया. उनका ये भी कहना है कि द एसोसिएटेड जर्नल ने 1938 से लेकर 2008 तक जितनी भी संपत्तियों को जमा किया था, सभी पर यंग इंडिया लि. ने कब्जा कर लिया. आरोप ये भी है कि यंग इंडिया लि. ने मात्र 50लाख रुपये में पूरी संपत्ति खरीद ली. इस मामले में सबसे पहले स्वामी ने ही 2012 में शिकायत की थी.
कांग्रेस पार्टी का स्टैंड रहा है कि यंग इंडिया लि. का गठन ‘दान के उद्देश्य से’ किया गया था, न कि लाभ के लिए.
ये भी पढ़ें : कर्नाटक कांग्रेस में संघर्ष: सिद्धारमैया या डीके शिवकुमार किस को चुनें, राहुल गांधी की परीक्षा

