उत्तराखंड में बढ़े भालू और गुलदार के हमले (ETV Bharat Graphics)
किरनकांत शर्मा
देहरादून: उत्तराखंड में खासकर गढ़वाल मंडल में भालू और गुलदार का खतरा बढ़ता जा रहा है. हालात इतने विकट हैं कि शादी ब्याह से लेकर रोजमर्रा के काम तक लोग इन जंगली जानवरों की दहशत में डरकर कर रहे हैं. वन विभाग हाई अलर्ट पर है. रुद्रप्रयाग जिले के केदारनाथ विधानसभा क्षेत्र की विधायक ने कहा कि पहाड़ों में शादी-विवाह बैंक्वेट हॉल में नहीं बल्कि खेतों में होते हैं. इस कारण बहुत दिक्कत पेश आ रही है. इस मामले को लेकर गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की.
उत्तराखंड में जंगली जानवरों के हमले लगातार बढ़ रहे हैं. खासकर गढ़वाल में भालू और गुलदार लोगों को घायल कर रहे हैं. आलम यह है कि अब लोग शादी ब्याह जैसे समारोह में भीड़ जुटाने से भी घबरा रहे हैं. पौड़ी हो या चमोली, रुद्रप्रयाग हो या उत्तरकाशी सभी जगह पर इन दो जंगली जानवरों के हमलों को देखते हुए वन विभाग ने अपनी QRT (Quick Reaction Team) टीम को अलर्ट पर रखा है. गश्त पर चलने वाले कर्मियों की संख्या भी बढ़ा दी है.
उत्तराखंड में बढ़े भालू और गुलदार के हमले (ETV Bharat)
उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल में बीते कुछ महीनों से भालू और गुलदार के हमलों में लगातार बढ़ोत्तरी ने पहाड़ की समस्या बढ़ा दी है. जंगलों से सटे गांवों में रहने वाले लोग अब पहले की तरह खुले में घूमने या रात के समय किसी सामाजिक कार्यक्रम में जाने से परहेज करने लगे हैं. हालात ऐसे बन चुके हैं कि कई जगहों पर शाम होते ही गांव बंद सा नजर आने लगता है. सड़कें सुनसान हो जाती हैं और लोग अपने दरवाजों को बंदकर घरों में ही कैद हो जाते हैं. वन विभाग ने इस बढ़ते खतरे को देखते हुए अपनी क्विक रिएक्शन टीम (QRT) को अलर्ट पर रखा है और गश्त बढ़ा दी है.
पौड़ी में बच्चों को खुद स्कूल छोड़ रहे अभिभावक: पौड़ी जिले के कई गांवों से गुलदार की बढ़ती गतिविधियों की खबरें लगातार सामने आ रही हैं. स्थानीय निवासी भास्कर बताते हैं कि-
गुलदार और भालू का आतंक ऐसा है कि लोग शादी ब्याहों में जाने से डर रहे हैं. बच्चे स्कूल-कॉलेज जा रहे हों, तो माता-पिता उन्हें रास्ते तक छोड़ने जा रहे हैं. शाम 6 बजे के बाद तो घरों के दरवाजे बंद हो जाते हैं. कोई अपने जानवरों को बाहर नहीं ले जा पा रहा है क्योंकि ये जानवर ना इंसानों को बक्श रहे हैं और ना जानवरों को.
-भास्कर, निवासी पौड़ी-
हाल ही में पौड़ी के एक गांव में सुबह घास लेने जंगल की ओर गई दो महिलाओं ने करीब 30 मीटर की दूरी पर गुलदार को घात लगाकर बैठे देखा. उन्होंने शोर मचाया जिसके बाद गुलदार भाग गया. लेकिन इस घटना ने पूरे गांव में दहशत फैला दी. गांव वालों ने बताया कि पिछले महीने भी एक बुजुर्ग व्यक्ति पर गुलदार ने हमला कर दिया था, जिससे वो गंभीर रूप से घायल हुए थे. उनका देहरादून में इलाज चल रहा है.
चमोली में भालू तीन महिलाओं पर कर चुका हमला: चमोली जिले में हालात और भी भयावह होते जा रहे हैं. यहां कई गांवों में भालू दिनदहाड़े घरों के पास मंडराते देखा जा रहा है. पिछले कुछ दिनों में तीन महिलाओं पर भालू हमला कर चुका है, जिनमें से दो गंभीर रूप से घायल हुईं. इनमें से एक घटना घाट ब्लॉक के पास की बताई जाती है, जहां एक 32 वर्षीय महिला अपने पशुओं के लिए घास काट रही थी. तभी झाड़ियों से अचानक एक भालू निकला और उस पर झपट पड़ा.
महिला के शोर मचाने पर आस-पास के लोगों ने डंडे लेकर भालू को दौड़ाया और उसे बचाया गया. यह वही इलाका था जहां पिछले वर्ष भी दो ग्रामीणों पर भालू ने हमला किया था. चमोली के स्थानीय निवासी विक्रम नेगी का कहना है कि-
अब महिलाएं जंगल में घास पत्ती लाने नहीं जा रही हैं. कई घरों में चारे की कमी होने लगी है. कुछ परिवारों ने मजबूरी में अपने पशुओं को निचले इलाकों में रिश्तेदारों के यहां भेज दिया है. हम सरकार से वन्य जीवों के आतंक से मुक्ति दिलाने की गुहार लगा रहे हैं.
-विक्रम सिंह नेगी, निवासी, चमोली-
रुद्रप्रयाग खेतों में काम करने से कतराने लगे किसान, रात्रि समारोह से भी परहेज: रुद्रप्रयाग जिले के जाखधार, खाड़ी और ऊखीमठ क्षेत्रों में कई गांवों के लोगों ने वन विभाग को लिखित शिकायत भेजी है. गांवों के पास स्थित जंगलों में गुलदार की बढ़ती मूवमेंट को लेकर लोग दहशत में हैं. एक महीने पहले ऊखीमठ के पास एक किसान पर गुलदार ने हमला कर दिया था. ये हमला तब हुआ जब वह शाम के समय अपने खेतों की सिंचाई करके लौट रहा था. ग्रामीणों के अनुसार यदि आसपास के लोगों ने शोर न मचाया होता, तो किसान की जान बचना मुश्किल था. स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ हफ्तों में गुलदार कई बार पशुओं को भी उठा ले गया है. इतना ही नहीं हाल में भालू ने रुद्रप्रयाग के रहने वाले भरत सिंह चौधरी को घायल कर दिया था. इस इलाके में भी लगातार भालू को देखा जा रहा है.
उत्तरकाशी में बढ़ते खतरे के बीच गांवों में गश्त बढ़ी: उत्तरकाशी के भटवाड़ी, पुरोला और धनारी क्षेत्रों में भी जंगली जानवरों की आवाजाही बढ़ गई है. यहां रात के समय गुलदार और अन्य जानवरों की गतिविधियां सामान्य हैं, लेकिन हाल में भालू के देखे जाने की घटनाएं बढ़ी हैं. कुछ दिन पहले पुरोला में एक घर के आंगन में लगे पेड़ से भालू फल खाने के लिए उतर आया. परिवार ने दरवाजे की झिर्री से उसे देखा और तुरंत वन विभाग को बताया. QRT टीम मौके पर पहुंची लेकिन भालू जंगल की ओर भाग चुका था. इस घटना ने आसपास की बस्तियों में दहशत फैला दी.
क्यों बढ़ रहे हैं हमले? वन विभाग की प्रारंभिक रिपोर्टों का संकेत: वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार जंगली जानवरों के गांवों की ओर बढ़ने के पीछे कई कारण हो सकते हैं. इन कारणों में निम्न प्रमुख हैं.
- जंगलों में भोजन की कमी या बदलाव
- मानव गतिविधि बढ़ने से उनके प्राकृतिक आवास का सिकुड़ना
- कचरे और पशुधन की उपलब्धता
- भालू-गुलदार का प्रजनन काल जिसमें वे अधिक आक्रामक रहते हैं
- मौसम का पैटर्न बदलने से जंगली जानवरों का स्वभाव भी बदला
- कोने-कोने तक सड़क पहुंचने और वनों के ऊपर हेलीकॉप्टरों की गड़गड़ाहट भी वन्य जीवों के विचलित होने का कारण
APCCF (Additional Principal Chief Conservator of Forests) विवेक पाण्डेय का कहना है कि-
हमें जिन इलाकों में ऐसी घटनाओं की सूचना मिल रही है, हम वहां लगातार टीम की संख्या बढ़ा रहे हैं. ऐसा नहीं है कि भालू या गुलदार रात या दिन का समय देख कर हमला कर रहे हैं, वो कभी भी हमला कर रहे हैं. इसलिए हमने गांव, सड़क और वनों के आसपास गश्त को बढ़ाया हुआ है. पहाड़ी क्षेत्रों में ठंड बढ़ने के साथ भालू नीचे के इलाकों की ओर भोजन की तलाश में आते रहते हैं.
-विवेक पाण्डेय, एपीसीसीएफ-
QRT टीम अलर्ट पर, लगाई अतिरिक्त गश्त: गढ़वाल के चारों जिलों पौड़ी, चमोली, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी में वन विभाग ने अपनी QRT टीम को हाई अलर्ट पर रखा है. कई जगह वनकर्मी रात भर गश्त कर रहे हैं और गांवों में लोगों से अपील भी कर रहे हैं. हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि सिर्फ गश्त से काम नहीं चलेगा. जो भालू और गुलदार लगातार गांवों में घुस रहे हैं, उन्हें पकड़ कर रेस्क्यू किया जाए. चमोली के कई जगह ग्रामीणों ने प्रशासन को ज्ञापन भेजकर आदमखोर घोषित कर कार्रवाई करने की मांग भी की है.
शादी-ब्याह और त्योहारों पर रोक जैसा माहौल: गढ़वाल के कई इलाकों में शादी-ब्याह, पूजा धार्मिक कार्यक्रम रात के समय करने में अब लोग घबरा रहे हैं. भास्कर बहुगुणा और प्रदीप रावत का कहना है कि गांवों में तो कार्यक्रम जल्दी निपटाने के लिए दोपहर में ही बारातें निकालने की परंपरा शुरू हो गई है. ग्रामीण बताते हैं पहले बारातें रात 9-10 बजे तक चलती थीं. अब अंधेरा होने से पहले ही सब कुछ संपन्न कर दिया जाता है. बैंड-बाजे कम हो गए हैं. भीड़ रात में बिल्कुल नहीं होती. ग्रामीण भी खतरे को देखते हुए एहतियात बरत रहे हैं.
विधायक ने बताए मौजूदा हालात: रुद्रपयाग के केदारनाथ विधानसभा क्षेत्र की विधायक आशा नौटियाल कहती हैं कि-
इस बार अचानक ये मामले बढ़े हैं. इसकी वजह ये भी है कि लोगों ने मवेशी पालने छोड़ दिए हैं. इससे झाड़ घास बहुत बड़ी हो गई हैं. इन बड़ी झाड़ों में गुलदार और भालू छिपकर बैठ रहे हैं. मैंने वन सचिव से कहा है कि अवेयरनेस कार्यक्रम चलाने के साथ साथ कुछ लोग गांव में नियुक्त किये जाएं. ताकि इन झाड़-झंकाड़ को काटा जा सके. शादी के सीजन में लोग बेहद घबराए हुए हैं. आलम ये है कि पहाड़ों में बैंक्वेट हॉल नहीं होते है. लोग अपने घर के बाहर आंगन या खेत में ही शादी की सभी रश्में पूरी करते हैं. ऐसे में ये भालू कभी सुबह सुबह आ धमक रहा है, तो कभी रात को आ जा रहा है. ऐसे में सभी गांवों में लोग बेहद घबराए हुए हैं.
केंद्रीय वन मंत्री से मिले गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी: इधर गढ़वाल लोकसभा सांसद एवं भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी ने बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात कर उत्तराखंड, विशेषकर गढ़वाल क्षेत्र में बढ़ते मानव–वन्य जीव संघर्ष के मामलों को लेकर गंभीर चर्चा की. सांसद अनिल बलूनी ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से गढ़वाल तथा राज्य के अन्य पर्वतीय क्षेत्रों में वन्य जीवों के हमलों की घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि देखी जा रही है, जिसमें कई लोग घायल हुए हैं और कुछ की दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु भी हुई है. उन्होंने बताया कि पहली बार इन क्षेत्रों में भालुओं के हमलों की घटनाएं भी सामने आ रही हैं, जो अत्यंत गंभीर और चिंताजनक विषय है.
वन्य जीवों के हमलों के वास्तविक कारणों के अध्ययन का आग्रह: उन्होंने केन्द्रीय मंत्री से आग्रह किया कि भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून सहित अन्य विशेषज्ञ संस्थानों के माध्यम से मानव–वन्य जीव संघर्ष के वास्तविक कारणों का विस्तृत अध्ययन कराया जाए, ताकि दीर्घकालिक और प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जा सके. सांसद बलूनी ने यह भी कहा कि मानव–वन्य जीव संघर्ष के कारण मृतक एवं घायल नागरिकों के लिए आर्थिक सहायता और संसाधनों की दृष्टि से उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य को अतिरिक्त सहयोग की आवश्यकता है. इस संबंध में उन्होंने केंद्र सरकार से विशेष आर्थिक सहायता एवं संसाधन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया.
केंद्रीय वन मंत्री ने दिया कार्रवाई का आश्वासन: इसके साथ ही उन्होंने गढ़वाल क्षेत्र में किसानों की फसलों को हो रहे भारी नुकसान पर भी चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि पहले से ही सीमित कृषि संसाधनों और विषम परिस्थितियों में कठिन परिश्रम करने वाले पर्वतीय किसानों की फसलें जब वन्य जीवों द्वारा नष्ट की जाती हैं, तो वे गंभीर आर्थिक संकट में आ जाते हैं. इस विषय पर उन्होंने प्रभावित किसानों के लिए विशेष मुआवजा एवं सहायता योजना लागू करने की मांग भी रखी. केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने अनिल बलूनी द्वारा उठाए गए विषयों को गंभीरता से सुना और शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया.
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