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उत्तराखंड में क्यों उठ रहे जिम ट्रेनर वसीम की संदिग्ध मौत पर सवाल? पुलिस ही करेगी पुलिस की जांच


देहरादून, किरनकांत शर्मा: उत्तराखंड में पुलिस मुठभेड़ और संदिग्ध मौतों के मामले में अक्सर चर्चाओं में रहते हैं. साल 2009 में देहरादून में हुए रणवीर सिंह फर्जी एनकाउंटर केस ने उत्तराखंड पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए थे. इस घटना ने न केवल पुलिस की विश्वसनीयता को ठेस पहुंचाई, बल्कि ये भी उजागर किया कि कैसे कानून के रखवाले कभी-कभी अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर सकते हैं. अब, रुड़की के माधोपुर गांव में जिम ट्रेनर वसीम की संदिग्ध मौत का मामला एक बार फिर पुलिस की जवाबदेही और निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है.

क्या था रणवीर एनकाउंटर मामला: रणवीर एनकाउंटर 3 जुलाई 2009 का मामला है. इस दिन पुलिस ने देहरादून के लाडपुर-रायपुर के जंगल में एक मुठभेड़ का दावा किया. जिसमें गाजियाबाद के एमबीए छात्र रणवीर सिंह को मार गिराया गया. उस समय पुलिस के अनुसार, रणवीर और उसके साथी संदिग्ध थे. उन्होंने पुलिस पर हमला किया, जिसके जवाब में पुलिस को गोली चलानी पड़ी.

रणवीर एनकाउंटर (ETV BHARAT)

हालांकि, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने पुलिस की इस कहानी की पोल खोल दी थी. रणवीर के शरीर पर 28 चोटें और 22 गोलियों के निशान पाए गए थे. जिनमें से कई गोलियां बेहद करीब से मारी गई थीं. यह साफ था कि रणवीर को पहले यातनाएं दी गईं, फिर एक सुनियोजित फर्जी मुठभेड़ में उसकी हत्या की गई. इस घटना के बाद रणवीर के परिवार ने पुलिस के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया. सीबीआई जांच में खुलासा हुआ कि रणवीर की एक दारोगा से मामूली कहासुनी हुई. जिसके बाद पुलिस उसे चौकी ले आई. जहां उसे टॉर्चर किया गया. बाद में फर्जी एनकाउंटर की कहानी गढ़ी.

तीस हजारी कोर्ट ने 2014 में 17 पुलिसकर्मियों को हत्या, अपहरण, और साक्ष्य मिटाने के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई. एक पुलिसकर्मी को गलत रिकॉर्ड तैयार करने के लिए दोषी ठहराया गया. बाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने 11 पुलिसकर्मियों को बरी कर दिया, लेकिन सात को दोषी ठहराया. यह मामला वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.

इतिहास का काला अध्याय है ये मामला: रणवीर एनकाउंटर ने उत्तराखंड पुलिस के इतिहास में एक गहरा दाग छोड़ा. इसने न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे, बल्कि यह भी दिखा कि कैसे व्यक्तिगत खुन्नस और छोटी सी कहासुनी के कारण निर्दोष लोगों का जीवन खतरे में पड़ सकती है. इस घटना के बाद उत्तराखंड में सालों तक कोई मुठभेड़ नहीं हुई, जो इस बात का संकेत था कि रणवीर का मामला पुलिस के लिए एक बड़ा सबक था.

ROORKEE WASEEM DEATH CASE

फिर सवालों के घेरे में उत्तराखंड पुलिस (ETV BHARAT)

रणवीर के बाद चर्चाओं में नया मामला: अब ऐसे ही एक मामले में उत्तराखंड पुलिस पर कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए पुलिस की कार्रवाई को कठघरे में खड़ा किया है. ये मामला हरिद्वार जिले के रुड़की में माधोपुर गांव से जुड़ा है. यहां साल 2024 के अगस्त महीने में एक जिम ट्रेनर की तालाब में डूबने से मौत के बाद परिजनों ने पुलिस पर आरोप लगाए थे. उस वक्त पुलिस ने कहा कि वसीम की मौत तालाब में डूबने के कारण हुई थी. पुलिस ने इस घटना के बाद बताया कि वसीम एक गौ-तस्कर है.

हालांकि, वसीम के परिवार ने इसे हत्या करार देते हुए पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए. परिवार का दावा था कि वसीम को पुलिस ने टारगेट किया. उसकी मौत को दुर्घटना के रूप में दिखाने की कोशिश की गई. अब कोर्ट ने इस मामले में एक सब-इंस्पेक्टर सहित 6 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं. ये इस बात का संकेत है कि मामला संदिग्ध है. इसमें पुलिस की भूमिका की निष्पक्ष जांच जरूरी है.

वसीम मौत केस से जुड़ी खबरें

परिजन कर रहे निष्पक्ष जांच की मांग: कोर्ट ने इस पूरे मामले की सुनवाई करते हुए कई तरह के सवाल खड़े किए हैं. इस पूरे मामले के बाद वसीम के परिजन निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए पुलिस पर कई तरह के आरोप लगा रहे थे. पुलिस ने अपनी जांच रिपोर्ट में ये कहा था कि एक स्कूटर पर व्यक्ति आ रहा था जो पुलिस को देखकर भागने लगा. पुलिस ने उसका पीछा कर उसे पकड़ा. उसकी गाड़ी में प्रतिबंधित मांस के कुछ पैकेट बरामद हुए. पुलिस ने आगे अपने जांच में कहा है कि जब युवक को पकड़ा गया तो उसके परिजन और कुछ स्थानीय लोग पुलिस को धमकाने लगे. साथ ही उसको भगाने की कोशिश भी करने लगे.

ROORKEE WASEEM DEATH CASE

कोर्ट में वसीम मौत मामला (ETV BHARAT)

कोर्ट ने क्या कहा: वसीम मौत मामला कोर्ट में उनके परिजन अलाउद्दीन लड़ रहे हैं. अलाउद्दीन ने पुलिस पर कई तरह के गंभीर आरोप लगाते हुए जो तथ्य दिए थे उसके बाद अब मुख्य न्यायाधीश मजिस्ट्रेट एवं मनीष कुमार श्रीवास्तव ने सभी पहलुओं को देखा परखा. उसके बाद 6 पुलिसकर्मी सहित एसआई पर मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं. कोर्ट ने अपने बयान में कई तरह की बातें कही. कोर्ट ने कहा पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जब यह स्पष्ट हुआ है कि मौत से पहले उसके शरीर पर गहरी 5 से अधिक चोट के निशान हैं, ये कैसे आए? इसके बारे में क्या जानकारी है? जिसके बाद कोर्ट ने इस पूरे मामले की जांच हरिद्वार मुख्यालय के एक सर्किल ऑफिसर रैंक के अधिकारी से करवाये जाने के आदेश दिये हैं.

पुलिस क्या बोली: कोर्ट के द्वारा मुकदमा दर्ज करने के आदेश के बाद पुलिस ने भी इस मामले में कोर्ट में रिवीजन किया. साथ ही अपना पक्ष रखा है. रुड़की सीओ सदर नरेंद्र पंत ने बताया फिलहाल पुलिस को स्टे मिल गया है. अब पुलिस कोर्ट की अगली सुनवाई का इंतजार कर रही है. अभी फिलहाल ये पूरा मामला कोर्ट में है, इसलिए इस पर कोई भी अधिकारी इससे ज्यादा कहने को तैयार नहीं है.

बता दें कि, सीजेएम कोर्ट के आदेश के विरुद्ध पुलिस की ओर से जिला एवं सत्र न्यायाधीश हरिद्वार में प्रार्थना पत्र दिया गया. प्रार्थना पत्र में FIR दर्ज न करने को कहा गया था. इस मामले पर सुनवाई करते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश हरिद्वार अनुरुद्ध भट्ट की कोर्ट ने सीजेएम कोर्ट के आदेश पर अग्रिम आदेशों तक रोक लगा दी है. इस मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी.

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