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आपदाएं हैं 'मैन मेड डिजास्टर', अवैध खनन करने वाले न भूलें 'किसी दिन हमारा परिवार उसी पुल से गुजरगा', बोले- केंद्रीय मंत्री


खनन और अवैध निर्माण पर जमकर बोले केंद्रीय मंत्री (PHOTO-ETV Bharat)

देहरादून: राजधानी दून में चल रही वर्ल्ड डिजास्टर कॉन्फ्रेंस में पहुंचे केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने जहां एक तरफ तीन डॉप्लर रडार की सौगात उत्तराखंड को दी, तो वहीं खनन और अवैध निर्माण पर राज्य सरकार की आंख खोल गए.

देहरादून में चल रहे हैं वर्ल्ड डिजास्टर कॉन्फ्रेंस में मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार डॉ जितेंद्र सिंह ने राज्य सरकारों की खराब व्यवस्था और अवैध खनन अतिक्रमण और अवैध निर्माण पर खुले तौर पर मंच से बोला. इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी इसी मंच पर बैठे थे.

हिमालय क्षेत्र में लगातार बढ़ रही आपदा और इससे हो रहे नुकसान पर बोलते हुए उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था के उस पहलू के बारे में कुछ ऐसी बातें बोलीं जिसे कोई भी सरकार स्वीकार करने से डरती है. दरअसल, मंच से बोलते हुए उन्होंने हिमालय क्षेत्र में लगातार बढ़ रही आपदाओं पर उनके मंत्रालय द्वारा किए गए अध्ययनों शोध के आधार पर बोलते हुए उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र में हुई तमाम भीषण आपदाओं के कारणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसके कुछ चार-पांच मुख्य कारण निकलकर सामने आए हैं.

खनन और अवैध निर्माण पर जमकर बोले केंद्रीय मंत्री (VIDEO-ETV Bharat)

इन कारणों में उन्होंने विश्वभर में हो रहे क्लाइमेट चेंज, ग्लेशियरों का पिघलना, ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF), हिमालय का फ्रेजाइल माउंटेन इको सिस्टम के अलावा कुछ ऐसे भी कारण बताए जो पूरी तरह से मानव निर्मित कारण है.

खराब प्रशासनिक सिस्टम आपदाओं का कारण: उन्होंने डिफोरेस्टेशन यानी पेड़ों का कटान को भी आपदा के मुख्य कारणों में गिनाया. डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि, जिस तरह से हमने जंगल काट दिए या फिर वह कट गए, वो भी हिमालय क्षेत्र में आपदा का एक बड़ा कारण है. इसके अलावा उन्होंने कहा कि, इन आपदाओं में सबसे बड़ा चिंता का विषय है ‘मैन मेड डिजास्टर’ यानी मानव निर्मित आपदाएं.

सिंह ने कहा कि, शोध में यह देखा गया कि जहां पर भी फ्लैशलाइट आया वहां पर एंक्रोचमेंट की गई थी. कई जगहों पर पूरा का पूरा नदी या फिर नाले का मुंह कर दिया गया था. रिफरेंस के तौर पर उन्होंने साल 2014 में श्रीनगर की बाढ़ का उदाहरण दिया जहां पर पूरा सचिवालय और विधानसभा झेलम नदी की बाढ़ में समाने लगी और फिर जब दिल्ली से अध्ययन के लिए टीम गई तो मालूम चला कि नदी के निकास के जगह पर उसे ब्लॉक करके वहां पर मॉल बना दिया गया था. इस तरह की स्थितियां अक्सर बड़ी आपदाओं का कारण बनती है जिसमें प्रशासनिक लापरवाही एक सबसे बड़ी भूमिका निभाती है.

उन्होंने कहा कि जब आपदाएं आती है तो जिम्मेदारी आपदा प्रबंधन पर डाली जाती है लेकिन यहां सबसे बड़ी भूमिका खराब प्रशासनिक सिस्टम के साथ लोगों के लालच की होती है और इस तरह से आपदाओं में थोड़ा-थोड़ा सभी की आहुति होती है.

अवैध खनन से जिन पुलों को नुकसान, उनसे कभी हमारा परिवार भी गुजरेगा: इसी तरह केंद्रीय मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने अवैध खनन पर भी सरकारों के सच को उजागर किया. उन्होंने आपदाओं से संबंधित विभागों द्वारा जारी किए जाने वाले रेगुलेशन पर बोलते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लैंड उसे रेगुलेशन जारी की गई है, जिसमें एनडीएमए और विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय भी शामिल है. इसमें अर्बन डेवलपमेंट डिपार्टमेंट को भी शामिल किया गया है, लेकिन इसका पालन गंभीरता से करने की जरूरत है.

उन्होंने कहा कि हमारे कई प्रदेशों में एक नई बीमारी शुरू हुई है जहां नई-नई सड़कें बन रही हैं. वहां पर अवैध खनन जमकर हो रहा है. जब पिछली बार आपदा आई और बाढ़ आई तो लोगों ने बहुत फोन किया कि इस तरह के अवैध खनन को रूकवाइए लेकिन उन्होंने दो टूक कहा कि ‘वो किसे कहें सब अपनी ही लोग हैं.’

अवैध खनन को बड़ा गंभीर विषय बताते हुए डॉ सिंह ने कहा कि, अवैध खनन से हमारे नदियों में बने पुलों को भारी नुकसान पहुंचता है. उन्होंने हाल में पंजाब का उदाहरण देते हुए कहा कि पंजाब राज्य को इस समय में बाढ़ का सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है. पंजाब में फ्लाई ओवर के 15 पैनल थे, जिसमें से 13 ये लोग खा गए. डेढ़ साल में ही 13 पैनल उखड़ गए. विभाग में शिकायत की तो ‘किसको बोलों, सब आपके ही लोग हैं.’

उन्होंने कहा कि अवैध खनन के मामले में हमें सख्त रेगुलेशन के साथ-साथ अपने पर संयम रखने की जरूरत है. ‘हमें लगता है कि अवैध खनन से चलो हमने चार पैसे कमा लिए, किसी की गाड़ी जा रही है तो जाने दें, लेकिन हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि किसी दिन हमारे बच्चे और हमारे परिवार भी उसी पुल के ऊपर से गुजरेंगे’.

मुख्यमंत्री ने भी दिया मंच से जवाब: केंद्रीय मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह की इन तमाम बातों के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की बोलने की बारी आई. उन्होंने भी इन तमाम बातों का जवाब दिया. सीएम ने कहा कि आज दिल्ली और कई जगह जब वह जाते हैं तो लोग कहते हैं कि आपके यहां आपदा आ गई, लगता है बहुत ज्यादा निर्माण हो गए. उन्होंने कहा कि यह धारणा बेहद गलत है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पौड़ी जिले के अलावा और तमाम ऐसे आपदाग्रस्त स्थानों का उदाहरण दिया जहां बिल्कुल निर्माण नहीं हुआ था लेकिन वहां पर भी आपदाएं आई.

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह शोध का विषय है कि आखिर उन जगहों पर भी आपदाएं आ रही हैं जहां पर किसी तरह का मानवीय हस्तक्षेप नहीं है. उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य आपदाओं से सबसे ज्यादा पीड़ित राज्य है.

इसके अलावा अवैध खनन को लेकर कार्यक्रम के बाद जब मुख्यमंत्री से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इन सभी विषयों पर शोध चल रहा है.

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