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घी टेस्ट फेल केस: फैसले पर आया पतंजलि आयुर्वेद का स्पष्टीकरण, फूड सेफ्टी ट्रिब्यूनल में करेंगे अपील


कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करेगा पतंजलि आयुर्वेद (File Photo- ETV Bharat)

हरिद्वार: 27 नवंबर को अपर जिलाधिकारी पिथौरागढ़ योगेंद्र सिंह के न्यायालय ने पतंजलि के गाय के घी के सैंपल फेल पाए जाने पर पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड और तीन कारोबारियों पर जुर्माना लगाया था. बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड इस फैसले से खुश नहीं है.

गाय के घी पर पतंजलि आयुर्वेद ने जारी किया स्पष्टीकरण: पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड ने एक स्पष्टीकरण प्रेस रिलीज जारी की है. इसमें कहा गया है कि-

यह स्पष्टीकरण मीडिया रिपोर्ट से हमारे संज्ञान में आए खाद्य सुरक्षा विभाग, पिथौरागढ़ द्वारा 20 अक्टूबर 2020 को खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत लिए गये पतंजलि गाय का घी के नमूने के संदर्भ में मुकदमा और न्यायालय द्वारा संबंधित आदेश के विषय में है.‌

यह आदेश निम्नलिखित कारणों से त्रुटिपूर्ण तथा विधि-विरुद्ध है:

  1. रेफरल प्रयोगशाला NABL से गाय के घी के परीक्षण के लिए मान्यता प्राप्त नहीं थी, इसलिए वहाँ किया गया परीक्षण विधि की दृष्टि से स्वीकार्य नहीं है। यह हास्यास्पद और घोर आपत्तिजनक है कि एक सब-स्टैंडर्ड लैब ने पतंजलि के सर्वश्रेष्ठ गाय के घी को सब-स्टैंडर्ड बताया है।
  2. जिन पैरामीटरों के आधार पर नमूना असफल घोषित किया गया, वे उस समय लागू ही नहीं थे, इसलिए उनका प्रयोग करना विधिक रूप से गलत है।
  3. पुन: परीक्षण नमूने की एक्सपायरी तिथि बीत जाने के बाद किया गया, जो कानून के अनुसार अमान्य है।

पतंजलि द्वारा बताया गया है कि,

न्यायालय ने इन सभी प्रमुख तर्कों पर विचार किए बिना प्रतिकूल आदेश पारित किया है, जो विधि की दृष्टि से सही नहीं है। इस आदेश के विरुद्ध फूड सेफ्टी ट्राइब्यूनल में अपील दायर की जा रही है, और हमें पूर्ण विश्वास है कि ट्राइब्यूनल के समक्ष हमारे पक्ष के ठोस आधारों पर यह मामला हमारे पक्ष में निर्णयित होगा।

वैसे भी इस फैसले में कहीं भी पतंजलि गाय का घी उपयोग के लिए हानिकारक नहीं बताया गया है। सिर्फ घी में RM Value के मानक से नाम-मात्र का अंतर पाया जाना ही स्पष्ट किया गया है। यह RM Value घी में volatile fatty acid (जो घी के गर्म करने पर उड़नशील होता है) का लेवल बताता है. यह प्राकृतिक प्रक्रिया है. इससे घी की गुणवत्ता पर कोई असर नहीं होता। जैसे शरीर में नाम-मात्र का हीमोग्लोबिन के अंतर प्राकृतिक होता है।

यह RM Value का मानक पशुओं के आहार और जलवायु आदि के आधार पर क्षेत्रीय स्तर पर भिन्न-भिन्न होता है। यहां तक कि सरकारी नियामक संस्था FSSAI भी इस RM Value को बदलती रहती है। कभी क्षेत्रीय आधार पर अलग-अलग RM Value का प्रावधान तो कभी राष्ट्रीय स्तर पर एक RM Value निश्चित किया जाता रहा है।

पतंजलि पूरे देश से कड़े मानदंडों और जांच के आधार पर दूध एवं गाय का घी एकत्र करके राष्ट्रीय स्तर पर विक्रय करती है।

इस स्पष्टीकरण पत्र में नीचे अधिकृत अधिकारी, पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड लिखा हुआ है. पंतजिल आयुर्वेद लिमिटेड ने जो स्पष्टीकरण पत्र सोशल मीडिया पर जारी किया है बाबा रामदेव ने उसे रीट्वीट किया है.

ये है पूरा मामला: गौरतलब है कि खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन पिथौरागढ़ के असिस्टेंट कमिश्नर आरके शर्मा बताया था कि 20 अक्टूबर 2020 को पिथौरागढ़ के कासनी से खाद्य सुरक्षा अधिकारी दिलीप जैन ने रूटीन चेकिंग के दौरान करन जनरल स्टोर से पतंजलि गाय के घी का नमूना लिया था. इसके बाद नमूने को राज्य सरकार की राजकीय प्रयोगशाला रुद्रपुर में भेजा गया, जहां ये घी मानकों से नीचे पाया गया.

असिस्टेंट कमिश्नर आरके शर्मा के अनुसार पतंजलि के अधिकारियों को 2021 में इसकी जानकारी दी गई, लेकिन काफी समय तक कंपनी की तरफ से कोई जवाब नहीं आया. हालांकि, बाद में कंपनी के अधिकारियों की तरफ से 15 अक्टूबर 2021 को दोबारा जांच की अपील की. कंपनी ने नमूनों की जांच सेंट्रल लैब से कराने की बात कही. इसके लिए पतंजलि की तरफ से 5 हजार रुपए की निर्धारित फीस भी ली गई थी.

Patanjali Ayurved cow ghee Case

खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन पिथौरागढ़ के असिस्टेंट कमिश्नर आरके शर्मा का लेटर (PHOTO- Food Safety and Drug Administration)

इसके बाद अधिकारियों की एक टीम 16 अक्टूबर 2021 को नमूनों की जांच के लिए राष्ट्रीय खाद्य प्रयोगशाला गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) पहुंची, जहां फिर से घी की जांच कराई गई. राष्ट्रीय खाद्य प्रयोगशाला ने 26 नंवबर 2021 को अपनी रिपोर्ट दी. वहां भी पतंजलि गाय के घी के नमूने मानकों पर खरे नहीं उतर पाए. इसके बाद दो महीने तक रिपोर्ट की स्टडी की गई, फिर 17 फरवरी 2022 को कोर्ट के सामने मामला रखा गया. इसके बाद पतंजलि को नोटिस जारी किया गया था.

खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी ने सबूत दिए: खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी दिलीप जैन ने मामले में न्याय निर्णायक अधिकारी/अपर जिलाधिकारी पिथौरागढ़ योगेंद्र सिंह के न्यायालय को सबूत दिए. कोर्ट ने 1,348 दिन बाद गुरुवार को अपना फैसला सुनाया और पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड (निर्माता) पर एक लाख रुपए, ब्रह्म एजेंसी (डिस्ट्रीब्यूटर) पर 25,000 रुपए और करन जनरल स्टोर (विक्रेता) पर 15,000 रुपए का जुर्माना लगाया गया. इसके साथ ही चेतावनी दी गई है कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम- 2006 के प्रावधानों का पालन किया जाए.

क्या है पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड? पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड योग गुरु बाबा रामदेव और उनके सहयोगी आचार्य बालकृष्ण द्वारा स्थापित की गई एक भारतीय कंपनी है. बाबा रामदेव ने पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड की स्थापना 2006 में की थी. ये कंपनी आयुर्वेदिक और हर्बल उत्पाद बनाती है. इन उत्पादों में खाद्य पदार्थ, आयुर्वेदिक दवाइयां, सौंदर्य प्रसाधन और रोजमर्रा के जीवन के लिए उपयोगी उत्पाद बनाए जाते हैं. पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड का हेड ऑफिस उत्तराखंड के कनखल, हरिद्वार में है. बाबा रामदेव का ये केंद्र योग और आयुर्वेद में बड़ा नाम रखता है.
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